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शान्ति पर्व
अध्याय १७९
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भरद्वाज उवाच
छिन्नस्य यदि वृक्षस्य न मूलं प्रतिरोहति |  १४   क
वीजान्यस्य प्रवर्तन्ते मृतः क्व पुनरेष्यति ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति