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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
समाश्वास्य च राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |  २४   क
नारदोऽप्यगमद्राजन्परमर्षिर्यथेप्सितम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति