सौप्तिक पर्व  अध्याय १८

वासुदेव उवाच

ता वै रुद्रमजानन्त्यो याथातथ्येन देवताः |  ३   क
नाकल्पय़न्त देवस्य स्थाणोर्भागं नराधिप ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति