सौप्तिक पर्व  अध्याय १८

वासुदेव उवाच

ततः क्रुद्धो महादेवस्तदुपादाय़ कार्मुकम् |  ८   क
आजगामाथ तत्रैव यत्र देवाः समीजिरे ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति