शान्ति पर्व  अध्याय १८

वैशम्पाय़न उवाच

प्रतिज्ञा तेऽन्यथा राजन्विचेष्टा चान्यथा तव |  ८   क
यद्राज्यं महदुत्सृज्य स्वल्पे तुष्यसि पार्थिव ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति