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शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
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याज्ञवल्क्य उवाच
दिवास्वप्ने विवादे च प्रमादेषु च वै रतिः |  २७   क
नृत्यवादित्रगीतानामज्ञानाच्छ्रद्दधानता |  २७   ख
द्वेषो धर्मविशेषाणामेते वै तामसा गुणाः ||  २७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति