वन पर्व  अध्याय २६८

मार्कण्डेय़ उवाच

विभीषणर्क्षाधिपती पुरस्कृत्याथ लक्ष्मणः |  २४   क
दक्षिणं नगरद्वारमवामृद्नाद्दुरासदम् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति