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अनुशासन पर्व
अध्याय १८
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वैशम्पाय़न उवाच
यावन्त्यस्य शरीरेषु रोमकूपाणि भारत |  ५९   क
तावद्वर्षसहस्राणि स्वर्गे वसति मानवः ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति