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शान्ति पर्व
अध्याय २२०
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भीष्म उवाच
यदा हि शोचतां शोको व्यसनं नापकर्षति |  ८७   क
सामर्थ्यं शोचतो नास्ति नाद्य शोचाम्यहं ततः ||  ८७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति