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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
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व्राह्मण उवाच
तत्र धर्मं प्रवक्ष्यामि सुखी भवति येन वै |  १३   क
आवर्तमानो जातीषु तथान्योन्यासु सत्तम ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति