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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
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व्राह्मण उवाच
ततः प्रधानमसृजच्चेतना सा शरीरिणाम् |  २५   क
यय़ा सर्वमिदं व्याप्तं यां लोके परमां विदुः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति