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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
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व्राह्मण उवाच
पापं चापि तथैव स्यात्पापेन मनसा कृतम् |  ३   क
पुरोधाय़ मनो हीह कर्मण्यात्मा प्रवर्तते ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति