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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
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व्राह्मण उवाच
सौक्ष्म्यादव्यक्तभावाच्च न स क्वचन सज्जते |  ६   क
सम्प्राप्य व्रह्मणः काय़ं तस्मात्तद्व्रह्म शाश्वतम् |  ६   ख
तद्वीजं सर्वभूतानां तेन जीवन्ति जन्तवः ||  ६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति