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द्रोण पर्व
अध्याय १२
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अर्जुन उवाच
यदि तस्य रणे साह्यं कुरुते वज्रभृत्स्वय़म् |  ११   क
देवैर्वा सहितो दैत्यैर्न त्वां प्राप्स्यत्यसौ मृधे ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति