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विराट पर्व
अध्याय १८
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द्रौपद्यु उवाच
किरीटं सूर्यसङ्काशं यस्य मूर्धनि शोभते |  १३   क
वेणीविकृतकेशान्तः सोऽय़मद्य धनञ्जय़ः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति