सभा पर्व  अध्याय ७

नारद उवाच

एषा सभा मय़ा राजन्दृष्टा पुष्करमालिनी |  २६   क
शतक्रतोर्महाराज याम्यां शृणु ममानघ ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति