menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय १८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
व्यावर्तय़े तत्र रथं नदीवेगमिवार्णवात् |  ५४   क
अवध्यं व्राह्मणं मन्ये येन ते विक्रमो हतः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति