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भीष्म पर्व
अध्याय ८४
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सञ्जय़ उवाच
आदित्यकेतुः सप्तत्या वह्वाशी चापि पञ्चभिः |  १७   क
नवत्या कुण्डधारस्तु विशालाक्षश्च सप्तभिः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति