सौप्तिक पर्व  अध्याय ७

द्रौणिरु उवाच

सर्वभूताशय़ विभो हविर्भूतमुपस्थितम् |  ५७   क
प्रतिगृहाण मां देव यद्यशक्याः परे मय़ा ||  ५७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति