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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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जनमेजय़ उवाच
कथमाप्लुत्य तस्मिंस्तु पुनराप्याय़ितः शशी |  ३९   क
एतन्मे सर्वमाचक्ष्व विस्तरेण महामुने ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति