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शल्य पर्व
अध्याय १८
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सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तदा राजन्धृष्टद्युम्नं च पार्षतम् |  ४०   क
वलेन चतुरङ्गेण नानादेश्या न्यवारय़न् ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति