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वन पर्व
अध्याय १८०
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वैशम्पाय़न उवाच
काम्यकं प्राप्य कौन्तेय़ा युधिष्ठिरपुरोगमाः |  १   क
कृतातिथ्या मुनिगणैर्निषेदुः सह कृष्णय़ा ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति