menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८०
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
कृष्णस्तु पार्थेन समेत्य विद्वा; न्धनञ्जय़ेनासुरतर्जनेन |  १३   क
वभौ यथा भूतपतिर्महात्मा; समेत्य साक्षाद्भगवान्गुहेन ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति