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उद्योग पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
मातुः कुलं पितृकुलं यत्र चैव प्रदीय़ते |  १६   क
कुलत्रय़ं संशय़ितं कुरुते कन्यका सताम् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति