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उद्योग पर्व
अध्याय १८०
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भीष्म उवाच
प्रहरे क्षत्रधर्मस्य यं त्वं राम समास्थितः |  २५   क
व्राह्मणः क्षत्रिय़त्वं हि याति शस्त्रसमुद्यमात् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति