menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८१
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
ये धर्ममेव प्रथमं चरन्ति; धर्मेण लव्ध्वा च धनानि काले |  ३७   क
दारानवाप्य क्रतुभिर्यजन्ते; तेषामय़ं चैव परश्च लोकः ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति