menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
देही च देहं सन्त्यज्य मृग्यमाणः शुभाशुभैः |  ७   क
कथं संय़ुज्यते प्रेत्य इह वा द्विजसत्तम ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति