आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३१

वैशम्पाय़न उवाच

ततस्ते पाण्डवा दूरादवतीर्य पदातय़ः |  १   क
अभिजग्मुर्नरपतेराश्रमं विनय़ानताः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति