menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १८२
chevron_left
chevron_right
भृगुरु उवाच
मनः प्राणे निगृह्णीय़ात्प्राणं व्रह्मणि धारय़ेत् |  १६   क
निर्वाणादेव निर्वाणो न च किञ्चिद्विचिन्तय़ेत् |  १६   ख
सुखं वै व्राह्मणो व्रह्म स वै तेनाधिगच्छति ||  १६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति