menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८२
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
चरमाणस्तु सोऽरण्ये तृणवीरुत्समावृते |  ४   क
कृष्णाजिनोत्तरासङ्गं ददर्श मुनिमन्तिके |  ४   ख
स तेन निहतोऽरण्ये मन्यमानेन वै मृगम् ||  ४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति