वन पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

येन पूर्वं महात्मानः खनमाना रसातलम् |  २६   क
दर्शनादेव निहताः सगरस्यात्मजा विभो ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति