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उद्योग पर्व
अध्याय १८२
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भीष्म उवाच
किं त्वेवाहं विह्वलः सम्प्रदृश्य; दिग्भ्यः सर्वास्ता महोल्का इवाग्नेः |  ८   क
नानारूपास्तेजसोग्रेण दीप्ता; यथादित्या द्वादश लोकसङ्क्षय़े ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति