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उद्योग पर्व
अध्याय १८२
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भीष्म उवाच
ततो जालं वाणमय़ं विवृत्य; सन्दृश्य भित्त्वा शरजालेन राजन् |  ९   क
द्वादशेषून्प्राहिणवं रणेऽहं; ततः शक्तीर्व्यधमं घोररूपाः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति