menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १८३
chevron_left
chevron_right
भृगुरु उवाच
तत्र त्वेवंविधा वृत्तिर्लोके सत्यानृता भवेत् |  ४   क
धर्माधर्मौ प्रकाशश्च तमो दुःखं सुखं तथा ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति