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विराट पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो विराटस्य सुतः सव्यमावृत्य वाजिनः |  २७   क
यमकं मण्डलं कृत्वा तान्योधान्प्रत्यवारय़त् ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति