menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८३
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
तत आदाय़ विप्रर्षे प्रतिगृह्य धनं वहु |  ५   क
भृत्यान्सुतान्संविभज्य ततो व्रज यथेप्सितम् |  ५   ख
एष वै परमो धर्मो धर्मविद्भिरुदाहृतः ||  ५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति