आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

उत्पाद्य धृतराष्ट्रं च पाण्डुं विदुरमेव च |  ५५   क
जगाम तपसे धीमान्पुनरेवाश्रमं प्रति ||  ५५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति