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वन पर्व
अध्याय १८४
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सरस्वत्यु उवाच
धेनुं दत्त्वा सुव्रतां साधुदोहां; कल्याणवत्सामपलाय़िनीं च |  ९   क
यावन्ति रोमाणि भवन्ति तस्या; स्तावद्वर्षाण्यश्नुते स्वर्गलोकम् ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति