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उद्योग पर्व
अध्याय १८४
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भीष्म उवाच
प्राजापत्यं विश्वकृतं प्रस्वापं नाम भारत |  १२   क
न हीदं वेद रामोऽपि पृथिव्यां वा पुमान्क्वचित् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति