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उद्योग पर्व
अध्याय १८४
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भीष्म उवाच
उत्तिष्ठ मा भैर्गाङ्गेय़ भय़ं ते नास्ति किञ्चन |  ९   क
रक्षामहे नरव्याघ्र स्वशरीरं हि नो भवान् ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति