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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
तस्मिन्नेवं समुत्पन्ने निमित्ते पाण्डुनन्दन |  ५५   क
व्रह्मा वृतो देवगणैरृषिभिश्च महात्मभिः |  ५५   ख
आजगामाशु तं देशं यत्र युद्धमवर्तत ||  ५५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति