अनुशासन पर्व  अध्याय ७८

वसिष्ठ उवाच

गोप्रदानरतो याति भित्त्वा जलदसञ्चय़ान् |  २४   क
विमानेनार्कवर्णेन दिवि राजन्विराजता ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति