शान्ति पर्व  अध्याय २८०

पराशर उवाच

एवं कर्माणि यानीह वुद्धिय़ुक्तानि भूपते |  २१   क
नसमानीह हीनानि तानि पुण्यतमान्यपि ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति