menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८५
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
उद्धृत्य गङ्गासलिलात्ततो मत्स्यं मनुः स्वय़म् |  २२   क
समुद्रमनय़त्पार्थ तत्र चैनमवासृजत् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति