menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८५
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
वटाकरमय़ं पाशमथ मत्स्यस्य मूर्धनि |  ३७   क
मनुर्मनुजशार्दूल तस्मिञ्शृङ्गे न्यवेशय़त् ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति