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भीष्म पर्व
अध्याय ८६
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सञ्जय़ उवाच
ते त्वदीय़ान्समासाद्य हय़सङ्घान्महाजवान् |  १७   क
क्रोडैः क्रोडानभिघ्नन्तो घोणाभिश्च परस्परम् |  १७   ख
निपेतुः सहसा राजन्सुवेगाभिहता भुवि ||  १७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति