उद्योग पर्व  अध्याय १८५

भीष्म उवाच

स संरव्धः समावृत्य वाणं कालान्तकोपमम् |  १०   क
सन्दधे वलवत्कृष्य घोरं शत्रुनिवर्हणम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति