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शान्ति पर्व
अध्याय १८६
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भीष्म उवाच
होमकाले तथा जुह्वन्नृतुकाले तथा व्रजन् |  ११   क
अनन्यस्त्रीजनः प्राज्ञो व्रह्मचारी तथा भवेत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति