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शान्ति पर्व
अध्याय १८६
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भीष्म उवाच
पापं कृतं न स्मरतीह मूढो; विवर्तमानस्य तदेति कर्तुः |  २८   क
राहुर्यथा चन्द्रमुपैति चापि; तथावुधं पापमुपैति कर्म ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति