menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८६
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
निषधं चापि पश्यामि श्वेतं च रजताचितम् |  १०२   क
पश्यामि च महीपाल पर्वतं गन्धमादनम् ||  १०२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति