menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८६
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
सततं धावमानश्च चिन्तय़ानो विशां पते |  १११   क
आसादय़ामि नैवान्तं तस्य राजन्महात्मनः ||  १११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति